Blinkit-अब नहीं होगी 10 मिनट में डिलीवरी! सरकार की सख्ती से क्विक कॉमर्स कंपनियों की बदली चाल
मुख्य संपादकप्रकाशित: 13 जनवरी 2026 | 08:48 PM5

दिल्ली-भारत में तेजी से बढ़ते क्विक कॉमर्स सेक्टर पर केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी और जोमैटो जैसी प्रमुख क्विक कॉमर्स कंपनियों को अपने ‘10 मिनट की डिलीवरी’ के दावे और अनिवार्य समय सीमा को समाप्त करने का निर्देश दिया है। यह फैसला केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया के हस्तक्षेप के बाद लिया गया है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि अल्ट्रा-फास्ट डिलीवरी की होड़ में डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा, सेहत और सामाजिक सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए।
क्यों उठाया गया यह कदम?
क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर पिछले कुछ वर्षों में ‘10 मिनट में डिलीवरी’ एक आक्रामक मार्केटिंग रणनीति बन गई थी। हालांकि, इसके कारण डिलीवरी पार्टनर्स पर समय का अत्यधिक दबाव बढ़ा, जिससे सड़क दुर्घटनाओं, नियमों की अनदेखी और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं सामने आईं। सरकार का कहना है कि गिग वर्कर्स देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनके अधिकारों व सुरक्षा की अनदेखी नहीं की जा सकती।
सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 का हवाला
सरकार ने इस फैसले को सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 के प्रावधानों से जोड़ते हुए कहा है कि गिग वर्कर्स के लिए बीमा, स्वास्थ्य सुरक्षा और सुरक्षित कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित करना नियोक्ताओं की जिम्मेदारी है। 10 मिनट जैसी कठोर डेडलाइन इन प्रावधानों की भावना के खिलाफ जाती है। इसी वजह से कंपनियों को अपने डिलीवरी मॉडल और ब्रांडिंग में बदलाव करने को कहा गया है।
कंपनियों ने क्या बदला?
सरकारी निर्देश का असर तुरंत दिखाई देने लगा है। सूत्रों के अनुसार, Blinkit ने अपनी ब्रांडिंग से ‘10 मिनट’ का दावा हटा दिया है। पहले जहां कंपनी की टैगलाइन “10 मिनट में 10,000 से अधिक उत्पाद” थी, वहीं अब इसे बदलकर “30,000 से अधिक उत्पाद आपके दरवाजे पर वितरित” कर दिया गया है। इसी तरह Zepto, Swiggy और Zomato से भी समय-आधारित वादों को नरम करने और डिलीवरी पार्टनर्स पर दबाव कम करने को कहा गया है।
डिलीवरी पार्टनर्स के लिए क्या मायने?
इस फैसले से क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले डिलीवरी पार्टनर्स को सीधा लाभ मिलेगा। अब उन्हें तय समय के दबाव में तेज़ रफ्तार या जोखिम भरे तरीके से डिलीवरी करने की मजबूरी नहीं रहेगी। इससे सड़क दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी और ट्रैफिक नियमों का पालन करना आसान होगा। साथ ही, समय सीमा में लचीलापन आने से डिलीवरी पार्टनर्स को बेहतर कार्य–परिस्थितियां मिलेंगी, जिससे उनका मानसिक तनाव घटेगा और काम के दौरान सुरक्षा बढ़ेगी
उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ेगा?
उपभोक्ताओं के लिए डिलीवरी समय में थोड़ा बदलाव संभव है, लेकिन सरकार का मानना है कि सुरक्षा और मानव जीवन की कीमत पर तेज डिलीवरी स्वीकार्य नहीं हो सकती। विशेषज्ञों के मुताबिक, ग्राहक अब भी तेज और भरोसेमंद सेवा पाएंगे, बस उसे “अत्यधिक जल्दबाजी” के बजाय “सुरक्षित और जिम्मेदार” तरीके से पूरा किया जाएगा।
आगे की राह
सरकार ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में क्विक कॉमर्स सेक्टर के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं। इनमें डिलीवरी समय, कार्य घंटे, बीमा और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सख्ती से निगरानी होगी। यह कदम न केवल गिग इकोनॉमी को अधिक टिकाऊ बनाएगा, बल्कि कंपनियों को भी जिम्मेदार कारोबारी मॉडल अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।
कुल मिलाकर, 10 मिनट की डिलीवरी डेडलाइन खत्म करने का फैसला क्विक कॉमर्स इंडस्ट्री में संतुलन लाने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है, जहां रफ्तार के साथ-साथ इंसानी सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता दी जाएगी।
इस फैसले से क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले डिलीवरी पार्टनर्स को सीधा लाभ मिलेगा। अब उन्हें तय समय के दबाव में तेज़ रफ्तार या जोखिम भरे तरीके से डिलीवरी करने की मजबूरी नहीं रहेगी। इससे सड़क दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी और ट्रैफिक नियमों का पालन करना आसान होगा। साथ ही, समय सीमा में लचीलापन आने से डिलीवरी पार्टनर्स को बेहतर कार्य–परिस्थितियां मिलेंगी, जिससे उनका मानसिक तनाव घटेगा और काम के दौरान सुरक्षा बढ़ेगी
इस मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा पहले ही सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने कहा था कि ‘10 मिनट डिलीवरी’ का मॉडल डिलीवरी पार्टनर्स पर बेवजह का दबाव बनाता है और कई बार उनकी जान तक जोखिम में पड़ जाती है। राघव चड्ढा का कहना था कि तेज डिलीवरी की होड़ में गिग वर्कर्स से ट्रैफिक नियम तोड़वाए जाते हैं, जो गलत है। उन्होंने सरकार से मांग की थी कि इस पूरे सिस्टम पर सख्त नियम बनाए जाएं और डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा जाए। सरकार का ताजा फैसला उनकी इसी मांग के अनुरूप माना जा रहा है।
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