टनकपुर सरस मेला: त्रिभुवन बने उम्मीद की उजली किरण, अंधेरी रात में मानवता की मिसाल
गीता जोशी (संपादक)प्रकाशित: 22 फरवरी 2026 | 02:57 PMअपडेट: 22 फरवरी 2026 | 03:02 PM18

टनकपुर: सरस मेले की चहल-पहल और रोशनी के बीच शुक्रवार रात घटी घटना ने व्यवस्थाओं की वास्तविकता उजागर कर दी। मेले से लौट रहे लगभग दस वाहनों की हवा पेट्रोल पंप परिसर में निकाल दी गई। देर रात महिलाएं, छोटे बच्चे और बुजुर्ग असुरक्षा और असहायता की स्थिति में सड़क किनारे खड़े रहे। उत्सव का उल्लास कुछ ही क्षणों में चिंता और अव्यवस्था में बदल गया। निष्क्रिय सीसीटीवी व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन की कमजोरी ने यह प्रश्न खड़ा किया कि बड़े आयोजनों में मूलभूत व्यवस्थाओं की जवाबदेही किसकी है। परंतु यह घटना भविष्य के लिए ठोस सुधार की मांग करती है।
उसी अव्यवस्थित और चिंताजनक माहौल में उप जिला चिकित्सालय टनकपुर में कार्यरत त्रिभुवन कोठारी ने पहल करते हुए स्थिति संभालने का दायित्व स्वयं उठाया। उन्होंने अपनी निजी गाड़ी में रखे पोर्टेबल हवा पंप की मदद से एक-एक कर सभी प्रभावित वाहनों में हवा भरी और फंसे परिवारों को आगे बढ़ने लायक बनाया। इस सेवा भाव में वे अकेले नहीं थे—उनकी पत्नी सविता कोठारी और पुत्री भी पूरे समय उनके साथ खड़ी रहीं और सहयोग करती रहीं। लगभग रात 1 बजे तक यह परिवार बिना थके सहायता करता रहा। संकट की उस घड़ी में उनका यह शांत, नि:स्वार्थ प्रयास सचमुच मानवीय संवेदना की जीवंत मिसाल बन गया।
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